
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक हालिया अपील ने देश के सराफा बाजार में हलचल पैदा कर दी है। पीएम ने देशवासियों से अगले एक साल तक गैर-जरूरी सोना खरीदने से बचने का आग्रह किया है। इस बयान के बाद आगरा सहित देशभर के स्वर्णकारों और कारीगरों में गहरी चिंता और नाराजगी देखी जा रही है। व्यापारियों का मानना है कि अगर लोगों ने सोना खरीदना बंद कर दिया, तो हजारों परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा।
आगरा के बड़े सराफा बाजार पर मंडराते बादल
आगरा को चांदी की देश की सबसे बड़ी मंडियों में से एक माना जाता है, लेकिन सोने का कारोबार भी यहाँ की रीढ़ है। आंकड़ों पर नज़र डालें तो स्थिति की गंभीरता समझ आती है:
रोजाना बिक्री: आगरा में हर दिन लगभग 10 से 15 किलो सोना बिकता है।
चांदी का दबदबा: यहाँ हर महीने करीब 5000 किलो चांदी का लेनदेन होता है।
कारोबार का आकार: प्रतिदिन 20 से 25 करोड़ रुपये का सोना कारोबार यहाँ की अर्थव्यवस्था को चलाता है।
जुड़े हुए लोग: शहर में 2000 से ज्यादा ज्वेलरी शोरूम, 200 होलसेल व्यापारी और लगभग 10 हजार हुनरमंद कारीगर इस काम से जुड़े हैं।
व्यापारियों का कहना है कि आसमान छूती कीमतों और बाजार की सुस्ती ने पहले ही कमर तोड़ रखी थी, और अब इस अपील ने रही-सही कसर पूरी कर दी है।
“दुकानें बंद करने की नौबत आ सकती है”
आगरा सराफा स्वर्णकार व्यावसायिक कमेटी के संरक्षक राजू मेहरा ने कड़े शब्दों में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि छोटे दुकानदार इस झटके को सहन नहीं कर पाएंगे। मेहरा ने यह अंदेशा भी जताया कि सरकार शायद भविष्य में सोना-चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी (आयात शुल्क) बढ़ाने की तैयारी में है और यह अपील उसी का एक संकेत हो सकती है। उन्होंने मांग की कि यदि कारोबार ठप होता है, तो सरकार को कारीगरों के लिए पेंशन और भत्ते की व्यवस्था करनी चाहिए।
15 हजार परिवारों के चूल्हे पर आंच
आगरा सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष नितेश अग्रवाल ने प्रधानमंत्री के विदेशी मुद्रा बचाने के उद्देश्य को तो समझा, लेकिन इसके सामाजिक असर पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस कारोबार से सीधे तौर पर 15 हजार मजदूर जुड़े हैं। अगर मांग गिरती है, तो इन गरीब परिवारों की रोजी-रोटी पर सबसे पहले वार होगा।
निवेशकों और मध्यम वर्ग की चिंता
सराफा कारोबारी तरुण अग्रवाल का मानना है कि इस अपील से वे लोग सबसे ज्यादा डरेंगे जो अपनी छोटी-छोटी बचत से सोने के गहने बनवाते हैं। वहीं, ज्वेलरी कारोबारी आनंद प्रकाश ने एक बहुत ही व्यावहारिक बात कही। उन्होंने कहा कि भारत में सोना सिर्फ एक धातु नहीं, बल्कि मुसीबत के वक्त की सुरक्षा और भावनात्मक बचत है। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि वे शादी-ब्याह जैसे जरूरी कामों के लिए खरीदारी जारी रखें।
क्या कहते हैं बाजार विशेषज्ञ?
जानकारों की राय मिली-जुली है। कुछ का कहना है कि अगर लंबे समय तक मांग कम रही, तो सराफा बाजार में भारी मंदी आ सकती है। वहीं, कुछ का मानना है कि पीएम की यह अपील सिर्फ उन लोगों के लिए है जो फिजूलखर्ची के तौर पर सोना जमा करते हैं, ताकि देश की विदेशी मुद्रा बचाई जा सके।


